Land Registry New Rule: सरकार ने जमीन और मकान से जुड़े कानूनों में बड़े बदलाव लागू कर दिए हैं। भारत में संपत्ति विवाद लंबे समय से एक गंभीर समस्या रहे हैं, जहां पारिवारिक झगड़े, फर्जी दस्तावेज और अस्पष्ट रिकॉर्ड आम बात बन चुके हैं। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए नए नियमों का उद्देश्य भूमि और मकान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विवादमुक्त बनाना है। ये बदलाव उन सभी लोगों के लिए बेहद अहम हैं जो संपत्ति के मालिक हैं या भविष्य में जमीन या घर खरीदने की योजना बना रहे हैं।
Land Registry New Rule
नए नियमों में सबसे अहम फैसला बुजुर्गों के अधिकारों को लेकर लिया गया है। अब यदि माता-पिता ने अपनी संपत्ति बच्चों के नाम कर दी है और बाद में संतान उनकी देखभाल नहीं करती या उनके साथ दुर्व्यवहार करती है, तो माता-पिता उस संपत्ति को वापस लेने का कानूनी अधिकार रखते हैं। यह प्रावधान वरिष्ठ नागरिकों के रखरखाव और कल्याण अधिनियम के अंतर्गत लागू किया गया है। अदालतों को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे माता-पिता को मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने वाले बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकें। इससे बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा दोनों को कानूनी मजबूती मिलती है।
स्व-अर्जित संपत्ति पर बेटे का स्वतः अधिकार नहीं
Land Registry New Rule 2026 ने संपत्ति को लेकर फैली एक बड़ी गलतफहमी को साफ कर दिया है। यदि किसी व्यक्ति ने अपनी मेहनत और निजी आय से जमीन या मकान खरीदा है, तो वह उसकी स्व-अर्जित संपत्ति मानी जाएगी। ऐसी संपत्ति पर बेटे का जन्म से कोई अधिकार नहीं होता। मालिक अपनी मर्जी से इस संपत्ति को बेच सकता है, दान कर सकता है या वसीयत के जरिए किसी को भी दे सकता है। बेटा माता-पिता के घर में तभी तक रह सकता है जब तक उन्हें अनुमति हो। हालांकि पैतृक संपत्ति के मामले में स्थिति अलग है, जहां बेटे और बेटियों दोनों को कानूनी हिस्सा मिलता है।
संयुक्त संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया हुई आसान
संयुक्त या पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर नए नियमों में बड़ी राहत दी गई है। अब किसी हिस्सेदार को अपना हिस्सा अलग कराने के लिए सभी सहमालिकों की सहमति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वह सीधे राजस्व विभाग में आवेदन कर अपने हिस्से का विभाजन करवा सकता है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को तेजी से डिजिटल किया जा रहा है। डिजिटल दस्तावेजों के कारण फर्जी दावों और नकली कागजात की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी, जिससे विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
बेटियों को संपत्ति में बराबरी का अधिकार
नए भूमि रजिस्ट्रेशन नियमों में बेटियों के अधिकारों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है। अब बेटी को पिता की संपत्ति में बेटे के समान हिस्सा मिलेगा और यह अधिकार शादी के बाद भी समाप्त नहीं होगा। चाहे संपत्ति पैतृक हो या स्व-अर्जित, बेटी कानूनी रूप से अपने हिस्से का दावा कर सकती है। वहीं दामाद को ससुराल की संपत्ति पर कोई स्वतः अधिकार नहीं दिया गया है। वह तभी संपत्ति पर दावा कर सकता है जब कानूनी रूप से उसके नाम पर संपत्ति ट्रांसफर की गई हो। यह बदलाव संपत्ति कानून में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता
Land Registry New Rule 2026 के तहत सभी जमीन और मकान के रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। इससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया तेज होगी और खरीदार को संपत्ति से जुड़ी पूरी जानकारी आसानी से मिल सकेगी। डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, बल्कि संपत्ति विवादों का निपटारा भी तेजी से हो सकेगा। गांवों और कस्बों में जहां वर्षों से रिकॉर्ड अधूरे या अस्पष्ट रहे हैं, वहां यह बदलाव बेहद प्रभावी साबित हो सकता है।
जमीन अधिग्रहण में मालिकों को मिलेगा पूरा अधिकार
नए नियमों में सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर भी सख्ती की गई है। अब किसी भी जमीन मालिक को उसकी जमीन से तब तक नहीं हटाया जा सकता, जब तक उसे बाजार मूल्य के अनुसार पूरा मुआवजा नहीं मिल जाता। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की जिम्मेदारी भी सरकार की होगी। यह बदलाव किसानों और जमीन मालिकों के हितों की रक्षा के लिए किया गया है, ताकि विकास और न्याय के बीच संतुलन बना रहे।
संपत्ति मालिकों के लिए जरूरी सावधानी
इन नए नियमों के लागू होने के बाद संपत्ति से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले दस्तावेजों की पूरी जांच करना जरूरी हो गया है। जमीन या मकान खरीदते समय डिजिटल रिकॉर्ड की पुष्टि करना और जरूरत पड़ने पर कानूनी सलाह लेना समझदारी होगी। समय पर वसीयत तैयार करना और स्वामित्व दस्तावेज अपडेट रखना भविष्य के विवादों से बचने में मदद करेगा।
