पीएम आवास योजना के ग्रामीण सर्वे आवेदन शुरू PMAY Gramin Survey

PMAY Gramin Survey: प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत सरकार ने एक बार फिर बड़ा सर्वे अभियान शुरू कर दिया है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य उन ग्रामीण परिवारों को योजना से जोड़ना है, जिन्हें अब तक पक्का घर बनाने की सरकारी सहायता नहीं मिल पाई थी। देश के कई गांवों में आज भी बड़ी संख्या में परिवार कच्चे मकानों में रह रहे हैं और आर्थिक कमजोरी के कारण अपना घर नहीं बना पा रहे हैं। ऐसे जरूरतमंद परिवारों तक लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ने यह नया सर्वे शुरू किया है।

PMAY Gramin Survey

पीएम आवास योजना ग्रामीण का लक्ष्य हर पात्र गरीब ग्रामीण परिवार को पक्का और सुरक्षित घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत सरकार पहले की तरह इस बार भी चयनित लाभार्थियों को घर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता देगी। जिन परिवारों ने पहले आवेदन नहीं किया था या किसी कारण से योजना से वंचित रह गए थे, उनके लिए यह सर्वे एक नया अवसर बनकर आया है।

मोबाइल ऐप से आसान हुआ PM Awas Yojana Gramin Survey

केंद्र सरकार ने सर्वे प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाने के लिए आवास प्लस मोबाइल ऐप जारी किया है। इस ऐप की मदद से पात्र ग्रामीण नागरिक अपने मोबाइल फोन से ही सर्वे का आवेदन कर सकते हैं। अब लोगों को कागजात लेकर ब्लॉक या जिला कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। घर की स्थिति, परिवार की जानकारी और जरूरी दस्तावेज मोबाइल ऐप के माध्यम से सीधे अपलोड किए जा सकते हैं।

सर्वे के बाद ऐसे मिलेगी आवास सहायता राशि

सर्वे फॉर्म जमा होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा परिवार की पात्रता की जांच की जाती है। दस्तावेजों और जानकारी का सत्यापन पूरा होने के बाद चयनित लाभार्थियों को पक्का घर बनाने के लिए किस्तों में सहायता राशि जारी की जाती है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों में यह सर्वे प्रक्रिया तेजी से चल रही है और हर दिन नए परिवार योजना से जुड़ रहे हैं।

2015 से ग्रामीणों के लिए चल रही PM Awas Yojana

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी। यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित की जाती है। इसका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक जीवन के लिए पक्का आवास उपलब्ध कराना है। योजना के तहत दी जाने वाली सहायता राशि आमतौर पर ₹1.20 लाख से ₹1.30 लाख के बीच होती है, जो राज्य और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार तय की जाती है।

महंगाई के दौर में ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत

बढ़ती महंगाई और सीमित आमदनी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में घर बनाना कई परिवारों के लिए मुश्किल हो गया है। पीएम आवास योजना ग्रामीण के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से इन परिवारों को बड़ा सहारा मिलता है। इससे न केवल उनका पक्का घर बनाने का सपना पूरा होता है, बल्कि जीवन स्तर और सामाजिक सुरक्षा में भी सुधार होता है।

किन ग्रामीण परिवारों को मिलेगा योजना का लाभ

इस योजना का लाभ उन्हीं ग्रामीण परिवारों को दिया जाता है, जिनके पास पहले से कोई पक्का मकान नहीं है और जो आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी में आते हैं। ऐसे परिवार जिन्होंने पहले कभी पीएम आवास योजना का लाभ नहीं लिया है, वे इस नए सर्वे के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आयकरदाता और संपन्न परिवार इस योजना के लिए पात्र नहीं माने जाते, ताकि सहायता केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।

PM Awas Yojana Gramin Survey के लिए जरूरी दस्तावेज

सर्वे के दौरान परिवार को अपनी पहचान और पात्रता साबित करने के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड और सक्रिय मोबाइल नंबर जैसी जानकारी देनी होती है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सत्यापन किया जाता है। सही और पूर्ण जानकारी होने पर आवेदन आगे बढ़ता है।

PM Awas Yojana Gramin में कितनी मिलेगी सहायता राशि

योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को घर निर्माण के लिए ₹1.20 लाख से ₹1.30 लाख तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि राज्य सरकार के नियमों और क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। आवेदन से पहले आधिकारिक दिशानिर्देश पढ़ना लाभकारी रहता है, ताकि किसी प्रकार की गलती न हो।

आवास प्लस ऐप से ऐसे करें ग्रामीण सर्वे का आवेदन

PM Awas Yojana Gramin Survey के लिए सबसे पहले आवास प्लस मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होता है। ऐप खोलने के बाद सेल्फ सर्वे विकल्प चुनकर आधार नंबर के माध्यम से लॉगिन किया जाता है। इसके बाद परिवार के सदस्यों की जानकारी, घर की वर्तमान स्थिति की फोटो और अन्य आवश्यक विवरण अपलोड किए जाते हैं। फॉर्म सबमिट होते ही आवेदन ऑनलाइन दर्ज हो जाता है और उसकी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।

यह नया सर्वे उन ग्रामीण परिवारों के लिए एक अहम मौका है, जो अब तक पक्के घर से वंचित हैं और सरकारी सहायता का इंतजार कर रहे थे।

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